आजकल हमारे पाकिस्तानी भाई बहुत नाराज है,अब भला इ भी कोई बात है कि उ
थोड़ी बहुत तफरी के लिए इन्डिया आना चाहे तो उनपर इंडियन आर्मी वाले रोक लगाते
है,एक तरफ तो इन्डिया कि कांग्रेस सरकार की तरफ से सबको खुली छूट है, की इस मुल्क
में जो चाहे सो आवे, जो चाहे सो करे। बम फोड़े, गोली दागे और मौका पाए तो मासूम
बच्चियों और औरतो से रेप करे। बस सरकार की, और उसके नातेदार रिश्तेदार और पुछल्लों
की चोरी चकारी से आँखे मूंदे रहे।
चीन वाले जब चाहे तब आते है और इन्डिया की बाउंड्री में घुस आते है। नारे लिखते है,पहरेदारो की पिटाई करते है, सड़क बनाते मजदूरो को भगा देते है और फिर
घुड्काते भी है कि बासठ भूल गए कि फिर से याद दिलाये...
पाकिस्तान से भी मियादाद आवे, रहमान मालिक आवे, जो चाहे सो
बके,इन्डिया सरकार तो कुछ नहीं कहती है, अब इ मिलिट्री वाले कौन होते है, चे चे
करने वाले, सो गुस्से में दू ठो इंडियन जवान को मार डाले और दू- तीन की पिटाई किए,
जाते जाते एक सैनिक का मुड़ काट ले गए, और रोको हमको...!
अब एक गंभीर बात... पाकिस्तान वाले आये क्रिकेट खेल गए, ग़जब का तमाशा
था, और भी तमाशे होंगे, इनपर शहरयार की लिखी चंद पंक्तिया याद आती है (ये अलग बात
है की इन्ही पंक्तियों की वजह से इंदिरा कांग्रेस की अम्मा इंदिरा गाँधी ने
आपातकाल में शहरयार को बैन कर दिया था )
यह जशन , यह
हंगामा, ख़िदमत नहीं साजिश है?
कुछ लोंगो की कोशिश है, की लोग बहल जाये !