Wednesday, May 6, 2015

इस हार में ही जीत है


(माँ की डायरी)

तीस जूनदो हजार तेरह ;-
आज एक विज्ञापन देखाजिसके शब्द थे "दुनिया को जीतने के लिएजरुरी हैमेरा बेटा पहले मुझे हराएमै खुद नहीं हारुगीबल्कि वो मुझे हरायेगा और जिस दिन वो मुझे हरायेगा दुनिया जीतने की उसकी शुरुआत होगी !!!"
तीस जूनदो हजार तेईस ;-
दस बरस पहले देखे एक विज्ञापन से प्रेरित होअपने आठ बरस के बच्चे के साथ मै रोज दौड़ लगाती रहीआज भी उसके साथ दौड़ती हूँउसे मै दुनिया का सबसे तेज धावक बनाने चली थीऔर मैंने तय किया थाजीतने के लिए उसे मुझे हराना पड़ेगादस बरस बीत गएउसने आज तक मुझे हराया नहींऔर खुद मै हारूंगी नहींपर आज वो दुनिया का सबसे तेज धावक है !!!
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(बेटे की डायरी )तीस जूनदो हजार तेरह ;-
आज मम्मा ने मेरे साथ रेस कीशुरू में वो खूब तेज दौड़ी पर आधी दूरी के बाद वो हाफ़ने लगीसो मैंने अपनी गति धीमी कर लीमम्मा मुझे दुनिया का सबसे तेज रेसर बनाना चाहती हैसो रेस के बाद उन्होंने मुझे बहुत प्यार किया और समझाया कि सबसे तेज दौड़ने के लिए लोगों को हराना पड़ता है और इसकी शुरुआत जो साथ दौड़ते है,उन्ही से होती हैजानता तो ये मै भी हूँ पर मम्मा ने कहे इसलिए इसे अपने पढने की मेज के सामने मैंने लिख के टांग दिया |
तीस जूनदो हजार तेईस ;-
आज मै दुनिया का सबसे तेज धावक हूँ और हर दिन जब घर होता हूँमाँ मेरे साथ दौड़ती हैमै आज भी उनसे रोज हारता हूँक्योकि मुझे पता हैजिस दिन मैंने अपनी माँ को हरा दियाउस दिन मै सबकुछ हार जाउगा...और मुझे जीवन भर बस जीतना हैलिहाजा ज़रूरी हैजीवन भर मै अपनी माँ से हारता रहू !


प्रकाशन का लिंक इस हार में ही जीत है

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