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सिविल लाइंस, देवरिया |
तुम कितना भी कहो न ।
क्या मैं मान जाउगा!
मैं अपना प्रश्न
बार बार दुहराउन्गा
एक बार-दो बार
दस बीस पचास सौ बार
क्या मैं मान जाउगा!
मैं अपना प्रश्न
बार बार दुहराउन्गा
एक बार-दो बार
दस बीस पचास सौ बार
ठीक है !
मत बैठो मेरे पास,
मैं बैठ जाउगा तुम्हारे पास,
मुदोगी आँखे ?
यह और भी अच्छा है,
अब मैं तुम्हारे मन के आकाश में
खयालो की पतंग बन लहराउन्गा,
तोड़ दोगी डोरी?
मैं और भी स्वतंत्र हो जाउगा!
हार कर खोलोगी आखे,
देखोगी मूझे।
मैं बोलूगा!
मत सुनो!
बंद कर लो कान,
मैं तुम्हारी धडकनों का संगीत गाऊंगा।
जो खोलोगी कान,
अपनी बात दुहराऊंगा,
धकेल दोगी बाहर?
बंद कर कमरा सो जाओगी?
मैं तुम्हारे सपनो में आउगा,
बार बार जगाऊंगा,
मत बैठो मेरे पास,
मैं बैठ जाउगा तुम्हारे पास,
मुदोगी आँखे ?
यह और भी अच्छा है,
अब मैं तुम्हारे मन के आकाश में
खयालो की पतंग बन लहराउन्गा,
तोड़ दोगी डोरी?
मैं और भी स्वतंत्र हो जाउगा!
हार कर खोलोगी आखे,
देखोगी मूझे।
मैं बोलूगा!
मत सुनो!
बंद कर लो कान,
मैं तुम्हारी धडकनों का संगीत गाऊंगा।
जो खोलोगी कान,
अपनी बात दुहराऊंगा,
धकेल दोगी बाहर?
बंद कर कमरा सो जाओगी?
मैं तुम्हारे सपनो में आउगा,
बार बार जगाऊंगा,

यह चलता रहेगा,
और
थक कर कह दोगी हाँ!
हलके से मुस्कुरा दोगी,
अब इतना सब क्या करना,
हलके से मुस्कुरा दो !
बस कह दो हाँ !
____________और
थक कर कह दोगी हाँ!
हलके से मुस्कुरा दोगी,
अब इतना सब क्या करना,
हलके से मुस्कुरा दो !
बस कह दो हाँ !
सिविल लाइंस, देवरिया |
its nice to read you
ReplyDeleteaap ka rachna falak adbhut hai,apratim!!!
ReplyDeleteachchha laga...aapkee rachna shailee alag lagee........aabhar..
ReplyDeletepyari si abhivyakti. bahut badhai.
ReplyDeletehamesha ki tarah bahut hi achha
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