(माँ की
डायरी)
तीस जून, दो हजार तेरह ;-
आज एक विज्ञापन देखा, जिसके शब्द थे "दुनिया को जीतने के लिए, जरुरी है, मेरा बेटा पहले मुझे हराए, मै खुद नहीं हारुगी, बल्कि वो मुझे हरायेगा और जिस दिन वो मुझे हरायेगा दुनिया जीतने की उसकी शुरुआत होगी !!!"
तीस जून, दो हजार तेईस ;-
दस बरस पहले देखे एक विज्ञापन से प्रेरित हो, अपने आठ बरस के बच्चे के साथ मै रोज दौड़ लगाती रही, आज भी उसके साथ दौड़ती हूँ, उसे मै दुनिया का सबसे तेज धावक बनाने चली थी, और मैंने तय किया था, जीतने के लिए उसे मुझे हराना पड़ेगा, दस बरस बीत गए, उसने आज तक मुझे हराया नहीं, और खुद मै हारूंगी नहीं, पर आज वो दुनिया का सबसे तेज धावक है !!!
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(बेटे की डायरी )
तीस जून, दो हजार तेरह ;-
आज मम्मा ने मेरे साथ रेस की, शुरू में वो खूब तेज दौड़ी पर आधी दूरी के बाद वो हाफ़ने लगी, सो मैंने अपनी गति धीमी कर ली, मम्मा मुझे दुनिया का सबसे तेज रेसर बनाना चाहती है, सो रेस के बाद उन्होंने मुझे बहुत प्यार किया और समझाया कि सबसे तेज दौड़ने के लिए लोगों को हराना पड़ता है और इसकी शुरुआत जो साथ दौड़ते है, उन्ही से होती है, जानता तो ये मै भी हूँ , पर मम्मा ने कहे इसलिए इसे अपने पढने की मेज के सामने मैंने लिख के टांग दिया |
तीस जून, दो हजार तेईस ;-
आज मै दुनिया का सबसे तेज धावक हूँ , और हर दिन जब घर होता हूँ, माँ मेरे साथ दौड़ती है, मै आज भी उनसे रोज हारता हूँ, क्योकि मुझे पता है, जिस दिन मैंने अपनी माँ को हरा दिया, उस दिन मै सबकुछ हार जाउगा...और मुझे जीवन भर बस जीतना है, लिहाजा ज़रूरी है, जीवन भर मै अपनी माँ से हारता रहू !
आज एक विज्ञापन देखा, जिसके शब्द थे "दुनिया को जीतने के लिए, जरुरी है, मेरा बेटा पहले मुझे हराए, मै खुद नहीं हारुगी, बल्कि वो मुझे हरायेगा और जिस दिन वो मुझे हरायेगा दुनिया जीतने की उसकी शुरुआत होगी !!!"
तीस जून, दो हजार तेईस ;-
दस बरस पहले देखे एक विज्ञापन से प्रेरित हो, अपने आठ बरस के बच्चे के साथ मै रोज दौड़ लगाती रही, आज भी उसके साथ दौड़ती हूँ, उसे मै दुनिया का सबसे तेज धावक बनाने चली थी, और मैंने तय किया था, जीतने के लिए उसे मुझे हराना पड़ेगा, दस बरस बीत गए, उसने आज तक मुझे हराया नहीं, और खुद मै हारूंगी नहीं, पर आज वो दुनिया का सबसे तेज धावक है !!!
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(बेटे की डायरी )
तीस जून, दो हजार तेरह ;-
आज मम्मा ने मेरे साथ रेस की, शुरू में वो खूब तेज दौड़ी पर आधी दूरी के बाद वो हाफ़ने लगी, सो मैंने अपनी गति धीमी कर ली, मम्मा मुझे दुनिया का सबसे तेज रेसर बनाना चाहती है, सो रेस के बाद उन्होंने मुझे बहुत प्यार किया और समझाया कि सबसे तेज दौड़ने के लिए लोगों को हराना पड़ता है और इसकी शुरुआत जो साथ दौड़ते है, उन्ही से होती है, जानता तो ये मै भी हूँ , पर मम्मा ने कहे इसलिए इसे अपने पढने की मेज के सामने मैंने लिख के टांग दिया |
तीस जून, दो हजार तेईस ;-
आज मै दुनिया का सबसे तेज धावक हूँ , और हर दिन जब घर होता हूँ, माँ मेरे साथ दौड़ती है, मै आज भी उनसे रोज हारता हूँ, क्योकि मुझे पता है, जिस दिन मैंने अपनी माँ को हरा दिया, उस दिन मै सबकुछ हार जाउगा...और मुझे जीवन भर बस जीतना है, लिहाजा ज़रूरी है, जीवन भर मै अपनी माँ से हारता रहू !
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