Sunday, July 20, 2014

हर दिल अजीज़ "अज़ीम प्रेमजी "



अजीम हाशिम प्रेमजी का जन्म 24-जुलाई-1945 को बम्बई में हुआ था, विप्रो कारपोरेशन के अध्यक्ष अज़ीम भारतीय कार्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े दानकर्ता हैं, अबतक वो अपनी एक चौथाई से जादा संपत्ति दान कर चुके हैं    
स्टेनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग स्नातक कर रहे 21 साल के युवा अजीम प्रेमजी की पढ़ाई अभी बाकी थी, जब नियति ने उनकी सहज जीवन की राह बंद कर दी, पिता की मौत के साथ अज़ीम के पास विकल्प सिमित थे | पढ़ाई पूरी न कर पाने की कसक के साथ युवा अजीम ने अमरीका से वतन वापसी की और वनस्पति तेल के अपने पारिवारिक व्यवसाय की बागडोर थाम ली| 1966 में अजीम ने जब अपने व्यवसाय की बागडोर थामी तो उसका सालाना व्यवसाय 2 मिलियन डालर था, अजीम चाहते तो बड़ी आसानी से अपने व्यवसाय को दुनियादारी से चला सकते थे, पर प्रेमजी को आरामतलबी और समझौतापरस्ती स्वीकार नहीं थी|
भारत उस वक्त कोटे परमिट राज में था, जहाँ पामोलिन आयल जैसी आम जरूरत की वस्तु का कोटा भी देखते देखते आदमी को धनवान बना सकता था, पर अज़ीम प्रेमजी ने अलग राह चुनी, नौकरशाहों की खुशामद करने की बजाय अपने धंधे के गुणवत्ता पर ध्यान केन्द्रित किया | उस वक़्त अचरज की बात थी, कि  इस स्तर पर कोई व्यवसायी नौकरशाही को खुश कर परमिट या लाइसेंस में अपना वक़्त जाया करने की बजाय, सीधे सीधे अपने ग्राहकों को उनकी अपेक्षा से भी बेहतर माल देने, ग्राहक और उत्पादक के बीच कम से कम बिचौलियों के जरिये, सबको जादा मुनाफा के सिधांत के साथ बाजार में उतर रहा हो|
पर अजीम को यहीं नहीं रुकना था, उन्होंने अपने व्यापार का प्रबंधन पूरीतरह पेशेवर रवैये से किया और देश के सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन और इंजीनिरिंग स्नातको को नौकरी पर रखा| आज भी जब भारत के तमाम कार्पोरेट घराने पारिवारिक प्रबंधन से संचालित होते हैं, तो सत्तर के दशक के भारत में यह बहुत बड़ी बात थी, जिसके साथ बहुत बड़ा जोखिम भी जुड़ा था, पर अजीम तो सबकुछ सिर्फ और सिर्फ उत्कृष्ट चाहते थे, अपने भावों को शब्द देते उन्होंने कहा भी उत्कृष्टता सिर्फ दिमाग से नहीं, बल्कि दिल और आत्मा से भी सोचो तब आती है
अजीम के लिए व्यवसाय दिमाग से नहीं दिल और आत्मा से होता था, जहाँ कठिनाइयों नजर नहीं आती नज़रों में बस अपने आदर्स बसे होते है, यही वजह थी कि 1979 में जब कंपूटर मशीन की दिग्गज कंपनी आईबीएम् को भारत छोड़ना पड़ा तो उससे उपजे शून्य को भरने के लिए अजीम की विप्रो कारपोरेशन ने वनस्पति तेल के धंधे से कंपूटर निर्मार्ण में छलांग लगा दी | अजीम का यह निर्णय इतनी बड़ी बात था कि भारत में विप्रो कारपोरेशन के विकास की कहानी कंपूटर उद्योग के विकास की कहानी है |
दो मिलियन डालर के सालाना धंधे से शुरुआत करते हुए आज अजीम की कंपनी का व्यवसाय 8 बिलियन डालर सालाना का है, पर आज भी अज़ीम और उनकी कसक जस की तस है, बेशक अजीम अपनी पढाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हुए पर 2 मिलियन की हजार गुनी रकम अर्थात 2 बिलियन डालर की रकम अज़ीम प्रेमजी ने बच्चो की पढ़ाई से जुड़े कार्यो के लिए 2010 में दान की, अज़ीम प्रेमजी की कसक अभी बाकी है, उनकी जिंदगी लम्बी चले यह दुआ है |
अजीम के जीवन की रोचक बातें :
·         अजीम का परिवार गुजरात के कच्छ इलाके से है, ये इस्माइली मुसलमान है |
·         अजीम के पिता को बंटवारे के वक़्त जिन्ना ने पाकिस्तान में बसने औए वहां के वित्तमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अजीम के पिता एम एच प्रेमजी ने नकार दिया
·         अजीम के दादा एक प्रतिष्ठित व्यवसायी थे, उन्हें बर्मा का राइस किंग भी कहा जाता है
·         1999 से 2005 तक लगातार छः वर्ष तक फ़ोर्ब्स के अनुसार अज़ीम सबसे अमीर भारतीय थे
·         दुनिया के साठ देशो में विप्रो का कारोबार फैला है, जिसमे डेढ़ लाख कर्मचारी है
·         विप्रो ब्रांड वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्टस लिमिटेड का संक्षित नाम है
·         2013 तक अजीम अपनी कुल संपत्ति का एक चौथाई दान कर चुके है    
·         टाइम पत्रिका द्वारा अज़ीम को दो बार, 2004 और 2011 में, दुनिया के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया जा चुका है, एशियावीक ने 2000 में उन्हें दुनिया के सर्वाधिक प्रभावी बीस लोगों में शुमार किया
·         अज़ीम जीवन में सादगी को महत्वपूर्ण मानते है और हवाई यात्राए मितव्ययी श्रेणी अर्थात इकोनामी क्लास में करते है, किसी शहर में अगर उनकी कंपनी का गेस्टहाउस हो तो होटल की बजाय गेस्टहाउस में रुकना पसंद करते हैं
·         शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अजीम प्रेमजी फाउन्डेशन भारत के सात राज्यों के तीन लाख से जादा स्कूलों में कार्यरत है  
सम्मान और पुरस्कार :
·         2005 में पदम् भूषण भारत सरकार द्वारा
·         2011 में पदम् विभूषण भारत सरकार द्वारा
·         फैराडे मेडल पाने वाले पहले भारतीय
·         लीजन ऑफ़ आनर फ़्रांस की सरकार द्वारा 
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कश्यप किशोर मिश्र 

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