शब्दों का कोई अर्थं नही होता , अर्थ उनमे निहित भाव का होता है , एक ही शब्द अलग अलग भाषाओ मे अलग-अलग अर्थ लिए होते है ।यहाँ तक की, उसी भाषा मे भी यमक और श्लेष के प्रभाव सेउनके निहितार्थ भी भिन्न भिन्न हो जाते है.
स्वराघात, स्पंदन, आरोह- अवरोह की तीव्रता या सहजता भी शब्दों के अर्थ परिवर्तित कर देती है । तो फ़िर क्या कारण है की हमारी व्यक्तिगत जिंदगी मे संवाद के लिए शब्दों का होना आवश्यक है , हम शब्दों के आधार पर किसी के भी व्यक्तित्व के बारे मे अपनी सहज ही एक धारणा बना लेते है ।
इसमे कोई शक नही की निश्चित ही किसी भी व्यक्ति की संवाद कुशलता, वार्तालाप के दौरान उसके शब्दों का चयन उसके बारे मे बहुत कुछ बता देता है पर एक व्यक्ति का पूर्ण परिचय उसके भाषिक संवाद की बनिस्पत संवाद की वो शैली जो प्रतीत कराती है, से जादा बेहतर तरीके से पाया जा सकता है ।
एक सधः जात शिशु दुनिया की समस्त भाषाओ से अनजान होता है, वास्तव मे वह अभी अनुभुतियो के आरंभिक आख्यान से रु ब रु भी नही हुआ होता है , पर अपने परिवेश मे व्याप्त माहौल के अनुरूप प्रतिक्रिया देता है । वो कौन सी भाषा है , जो एक मासूम सी छोटी सी बच्ची को किसी की वासनापूर्ण निगाहों से चेता रही होती है ।
अक्सर हम किसी से बात करते सतवाना पूर्ण शब्दों के बद भी असहज महसूस करते है , और कभी कभी जब की बार बार मांगने पर भी अस्वासन नही मिलता तब भी ख़ुद को आश्वस्त महसूस करते है।
ये कौन सी भाषा है जिसमे हम बिना किए भी अपने परम पीता से संवाद स्थापित कर लेते है । वास्तव मे संवाद शब्द मात्र का अंतरण नही बल्कि भाव का अंतरण ज्यादा है ।
स्वराघात, स्पंदन, आरोह- अवरोह की तीव्रता या सहजता भी शब्दों के अर्थ परिवर्तित कर देती है । तो फ़िर क्या कारण है की हमारी व्यक्तिगत जिंदगी मे संवाद के लिए शब्दों का होना आवश्यक है , हम शब्दों के आधार पर किसी के भी व्यक्तित्व के बारे मे अपनी सहज ही एक धारणा बना लेते है ।
इसमे कोई शक नही की निश्चित ही किसी भी व्यक्ति की संवाद कुशलता, वार्तालाप के दौरान उसके शब्दों का चयन उसके बारे मे बहुत कुछ बता देता है पर एक व्यक्ति का पूर्ण परिचय उसके भाषिक संवाद की बनिस्पत संवाद की वो शैली जो प्रतीत कराती है, से जादा बेहतर तरीके से पाया जा सकता है ।
एक सधः जात शिशु दुनिया की समस्त भाषाओ से अनजान होता है, वास्तव मे वह अभी अनुभुतियो के आरंभिक आख्यान से रु ब रु भी नही हुआ होता है , पर अपने परिवेश मे व्याप्त माहौल के अनुरूप प्रतिक्रिया देता है । वो कौन सी भाषा है , जो एक मासूम सी छोटी सी बच्ची को किसी की वासनापूर्ण निगाहों से चेता रही होती है ।
अक्सर हम किसी से बात करते सतवाना पूर्ण शब्दों के बद भी असहज महसूस करते है , और कभी कभी जब की बार बार मांगने पर भी अस्वासन नही मिलता तब भी ख़ुद को आश्वस्त महसूस करते है।
ये कौन सी भाषा है जिसमे हम बिना किए भी अपने परम पीता से संवाद स्थापित कर लेते है । वास्तव मे संवाद शब्द मात्र का अंतरण नही बल्कि भाव का अंतरण ज्यादा है ।
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