वीरान
रेगिस्तान में दो दरवेस बैठे बात कर रहे थे, दूर-दूर तक फैले वीराने को देखते हुए
पहले दरवेस ने लम्बी साँस भरी और कहा, कितना वीरान है यहाँ सबकुछ| दूसरा दरवेस जो
बुजुर्ग था, वह उन पत्थरों को उललने-पुलटने लगा, जिसपर वो बैठे थे, रात की ओस
पत्थरों की तली में मौजूद थी, एक पत्थर के तले एक अंकुरित बीज दिखा, बुजुर्ग दरवेस
ने उसे दिखाते हुए कहा “यह
देखो, यहाँ जीवन है”|
आदमी
का अपना दृष्टिकोण उसकी जीवन दृष्टि तय करता है, एक ऐसा आदमी जो अपने शरीर का कोई
भी हिस्सा नहीं हिला सकता, कोई इशारा नहीं कर सकता, कुछ बोल नहीं सकता, कुछ खा पी
नहीं सकता, इसके बाद भी, हार मानने से इन्कार करता है और दुनिया उसे ब्रह्माण्ड की
जटिल गुत्थिया सुलझाने वाले शख्स “स्टीफन
हाकिंग” के नाम से
पहचानती है| हाकिंग की लिखी किताब “अ
ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ की एक करोड़ से जादा प्रतियां बीस वर्षो के भीतर बिक चुकी
है, हाकिंग थमे नहीं है, उनकी जीवन यात्रा सतत जारी है|
एक
ऐसा मनोरोगी जिसे भ्रम होता हो कि कोई उससे बात कर रहा है, वह यह समझ ही नहीं पाए
कि सामने जो आदमी खड़ा है, वो असल में खड़ा है अथवा मनोविकार की वजह से उसका भ्रम है|
एक ऐसा आदमी जो अपने दिमाग में विकार के वजह से, जो नहीं है, उन्हें भी उसी तरह
देखता समझता हो जैसे असल दुनिया को देखता समझता हो और इस पागलपन की वजह से महज
इकतीस वर्ष की उम्र में ईलाज के लिए पागलखाने भेज दिया गया हो, जीवन से हार मान
लेने से इन्कार कर देता है, ग्यारह साल बाद वह पागलखाने से बाहर आता है और दुनियाँ
को एक से एक गणितीय और आर्थिक सिधांत देता है और “नोबेल पुरस्कार” प्राप्त करता है, दुनियाँ “जॉन नैश” को आज उसके ढेर
सारे गणितीय और अर्थशास्त्र के सूत्रों की वजह से जानती है|
कुँए
की पथरीली सिल पर रस्सी बार-बार ऊपर-नीचे आती-जाती है, यह सतत-निरंतर प्रक्रिया
पत्थर को घिस देती है, पथरीली जगत पर रस्सी के निशान बन जाते है, दुनियाँ ऐसे लोगो
से भरी पड़ी है, जिनकी उपलब्धियां “रस्सी
से पत्थर की जगत पर पड़े निशान”
की तरह सतत प्रयास का नतीजा है|
हम
थामस एडिसन को जानते है, जो बहरा था पर बहरापन उसके लिए अवरोध नहीं बन सका | एक
नया धर्म चलाने वाले, सम्पूर्ण भारत में अपना विशाल साम्राज्य बनाने वाले, जमीनों
की ठीक ठीक पैमाईस की व्यवस्था करने वाला अकबर पूरी तरह अनपढ़ था, पर लिखना-पढ़ना न
जानना भी, कभी उसके लिए बाधा नहीं बन सका|
जरा कल्पना करिए उस संगीतकार की जिसका संगीत
सुनकर श्रोता अपने भाव पर नियंत्रण न रख सके, एक तरफ जिसकी धुनों की उदासी
सुननेवाले को रुला दे, तो दूसरी तरफ़ उसके संगीत का उल्लास, उदासी भरे माहौल में भी
लोगो को नृत्य करने को मजबूर कर दे, बीती दो शताब्दियों से जादा वक्त से अपने
संगीत से दुनिया को अभिभूत करने वाला संगीतकार लुडविग बीथोवन ख़ुद अपना संगीत सुनने
में असमर्थ था, पर उसका बहरापन उसकी बाधा
नहीं बन सका|
जीवन वही है, जैसा उसे हम देखते है, जैसा उसे हम बनाते है, मन के हारे हार, मन के जीते जीत है |
जीवन वही है, जैसा उसे हम देखते है, जैसा उसे हम बनाते है, मन के हारे हार, मन के जीते जीत है |


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