जो है
!
__________________________
ख़ामोशी का शोर, बहुत गहरा होता है,
बड़ी टीस पहुचाती है, भुरभुरी बर्फ सी चुप्पी|
चुप्पी ढंक देती है,प्रतिरोध की असल सूरत |
कुछ भी नहीं बदलता, प्रतिरोध रहता है, जस का तस |
बस एक परदा चढ़ जाता है, ख़ामोशी का |
जैसे पसर जाती है, बर्फ दूर दूर तक,
जो भी होता है, उसे वैसे ही रखे, बस ढक कर |
चुप्पी का यह परदा, बहुत डराता है, सोने नहीं देता रात रात भर|
गो की, भिची मुठ्ठियों से प्रतिरोधी नारे लगाते चेहरे चीन्ह लिए जाते है, आसानी से|
ख़ामोशी के परदे तले, फैलते प्रतिरोध चीन्हे नहीं जाते |
ये कितने गहरे है, पता ही नहीं चलता |
और एक दिन !
सर्कस का जोकर,
शो के बाद,
__________________________
ख़ामोशी का शोर, बहुत गहरा होता है,
बड़ी टीस पहुचाती है, भुरभुरी बर्फ सी चुप्पी|
चुप्पी ढंक देती है,प्रतिरोध की असल सूरत |
कुछ भी नहीं बदलता, प्रतिरोध रहता है, जस का तस |
बस एक परदा चढ़ जाता है, ख़ामोशी का |
जैसे पसर जाती है, बर्फ दूर दूर तक,
जो भी होता है, उसे वैसे ही रखे, बस ढक कर |
चुप्पी का यह परदा, बहुत डराता है, सोने नहीं देता रात रात भर|
गो की, भिची मुठ्ठियों से प्रतिरोधी नारे लगाते चेहरे चीन्ह लिए जाते है, आसानी से|
ख़ामोशी के परदे तले, फैलते प्रतिरोध चीन्हे नहीं जाते |
ये कितने गहरे है, पता ही नहीं चलता |
और एक दिन !
सर्कस का जोकर,
शो के बाद,
या हो सकता है शो के दौरान ही,
अपना मुखौटा उतार फेकता है,
उसके हाथ में है, ख़ामोशी से बना खंजर,
(ख़ामोशी दुनिया की सबसे कठोर वस्तु है,
अपना मुखौटा उतार फेकता है,
उसके हाथ में है, ख़ामोशी से बना खंजर,
(ख़ामोशी दुनिया की सबसे कठोर वस्तु है,
यह बात किताबों में पढ़ानी खतरनाक मानी जाती है)
जोकर इस खंजर से कलेजा चाक कर देता है |
और अपना मुखौटा पहन लेता है |
शो चलता रहता है !
जोकर इस खंजर से कलेजा चाक कर देता है |
और अपना मुखौटा पहन लेता है |
शो चलता रहता है !
वह ख़ामोशी की बर्फ तले हत्यारा था |
अरे !
तुम्हारी तालियाँ रुक क्यों गई ?
तुम्हारी हंसी को क्या हो गया ?
ओह !
तुम खामोश भंगिमाओ की नक़ल कर रहे हो,
है न ?
करो करो !!!
______________
कश्यप किशोर मिश्र
No comments:
Post a Comment