Friday, February 28, 2014

टूटना और अन्य कविताये

टूटना
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(एक दम अलग सन्दर्भ में,)

एक ढपली थी,
मेरे पास
बुआ की |

अल्हड़, जिंदादिल बुआ
जिन्दा रहना जानती थी |
अपनी मौत के
पहले की रात
वो खूब नाची थी,
देर तक गाती रही
ढपली बजाती रही !

सन अठत्तर से आज तक...
उस ढपली में बसी रही
बुआ के कदमो की थाप
गुंजन आवाज |

अनायास
कल ढपली फूट गयी
मै महसूस कर रहा हूँ,
टूटना क्या होता है |
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ख्याल बासी नहीं होते
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खयालो की खुशबू
हमेशा ताज़ी रहती है !
वैसे ही, जैसे माँ |
जैसे माटी
और उसका सोंधापन |
जैसे पानी |
ऐसे ही,
ख्याल कभी बासी नहीं होते !

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धर्म
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तज देना,
करना अस्वीकार,
सवाल खड़े करना,
गालिया देना
आसान है !
पर
हमेशा ही बहुत कठिन रहा है,
बुनियादी रूप से ...
धार्मिक होना !

Adoption is always tough, rejection is easy.
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