Thursday, April 11, 2013

एम्म नास्तिक धर्म...!



अपनी सुविधा के हिसाब से पाला बदल लेना गलत बात है, मै धार्मिक हूँ, या नास्तिक हूँ यह बात तबतक महत्वपूर्ण नहीं जबतक मेरी आस्तिकता या नास्तिकता किसी को आहत नहीं करती, मै नास्तिक हूँ, इसका यह अर्थ कतई नहीं, कि मै किसी अन्य की आस्था का मजाक उडाऊ, अपनी अंतिम साँसे ले रही माँ के मुह में मै निश्चित ही, तुलसी दल और गंगा जल डालूँगा और इसपर मेरा कोई मित्र अगर मुझे इसे आडम्बर कह के रोकने की कोशिश करेगा, तो यक़ीनन मै उसे एक तमाचा रशीद करूँगा | क्योकि यह मेरा नहीं मेरी अंतिम सांसे ले रही माँ के आस्था का मामला है और उनकी यह आस्था किसी को नुकसान नहीं पहुचती...

मेरे बगीचे में तुलसी के पौधे, मेरे लिए औषधीय पौधे मात्र है, पर अपनी माँ के मौजूद रहने पर उन पौधों को अपने "सेकेटियर" से मै दूर रखता हूँ, क्योकि मेरे माँ के लिए तुलसी पूज्य है, और उनकी कटाई छटाई वर्जित है |

धर्मों का विरोध करते करते हमें पता ही नहीं चलता कि कब हम अपनी नास्तिकता को ही एक धर्म में तब्दील कर लेते है, दुसरो की आस्था का वैज्ञानिक अथवा तार्किक प्रमाण मांगते मांगते हम एकदम भूल जाते है, की हमने भी नास्तिकता को अपनी आस्था बना लिया है ऐसे में मुझे अक्सर अपने मित्र Imtiaz Mahmood से जाहिर की अपनी आशंका अक्सर याद आती है, कि "I fear this no religion would not convert in "NO" religion"
अक्सर अपने तथाकथित नास्तिक मित्रों को मै देखता हूँ कि हालाँकि वो अपने नास्तिक होने का ढोल तो बड़ा तगड़ा पिटते है, पर अपने पारिवारिक धर्म का पक्ष मौका पाते ही लेने लगते है, मसलन "अगर हिन्दू मंदिर जाने के लिए छुट्टी ले सकता है तो मुस्लमान मस्जिद जाने के लिए छुट्टी क्यों नहीं ले सकता" या फिर "अगर मुसलमान जालीदार टोपी पहन सकता है तो वो भगवा शर्ट क्यों नहीं पहन सकता"
और साथ में, यह जरुर जोड़ेगे हालाकि मै नास्तिक हूँ...!
भाई मेरे, काम के समय में चाहे मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा या चर्च कही जाओ ये गलत है और धर्म के नाम पर ड्रेस कोड का उल्लंघन भी गलत है, अब चाहे अगले का नाम वसीम जाफर हो या कपिल देव या नवजोत सिद्धू |
और हाँ मेरे हिसाब से आप का धार्मिक होना मेरे लिए आपको पूज्य बनाएगा अगर वह निर्माण के लिए है (constructive) सबसे महत्वपूर्ण आपका रवैया है, आपका आस्तिक या नास्तिक होना नहीं...
Being constructive or destructive is only important, as far as your believe or disbelieve in religion is concerned...!
(The last line written in English, is the essence of above, so that my foreign friends can understand, the object in some sense)

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