Tuesday, April 9, 2013

हमारे बच्चे हमसे साहसी है

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कल मेरा भांजा मुझसे मिलने आया ...!
वक़्त ने उसके चेहरे पर युवावस्था की लुनाई की एक परत चमका दी है, लिहाजा उसे देखना आँखों को सुकून दे रहा था, अभी हफ्ते भर पहले जीजा ( सुधाकर मणि त्रिपाठी) से गुफ्तगू के दौरान पता चला की वह फिल्मो में हाथ- पाव मार रहा हैं, दीदी भी थोड़ी संशय में थी, पर मेरी राय थी "अभी उसे उड़ने दो !" उड़ने लगा तो ठीक नहीं तो हम सब तो है, ही ...!!!
मेरा यह पक्के तौर पर मानना है , की अगर बच्चे में संस्कार हैं, वो संवेदनशील है, अपने बड़ो का आदर करना जानता है और परिवार से जुड़ा हुआ है, तो इन बच्चो को रोकिये मत...|
करने दीजिये इन्हें अपने मन की, ये बहुत कुछ वो भी करेंगे, जो अपनी सीमाओ की वजह से , हम चाह कर भी नहीं कर पाए...|
...और हमारे रहते अगर उनकी उडान गलत हुई, तो सम्हालने के लिए हम मौजूद तो है, ही तो ढेर सारा आशीष अपने भांजे को ...!
और हाँ ... अब वो स्वेतांक से करण हो गया है, भूमिका बदलने की भूमिका में ही नाम भी बदल गया...यह अहसास थोड़ा डराता भी है, पर निःसंदेह हमारे बच्चे हमसे साहसी है, इसका आस्वस्ति बोध भी होता है ...|

पच्चीस फ़रवरी की टीप

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