Thursday, May 30, 2013

कैसे गुजारेगी हमारी मन्नू !!!

लड़के वालों की तरफ से कोई मांग नहीं हुई, लड़का सुन्दर, सुशील, कमाऊ था|
परिवार भी हर तरीके से अच्छा था, उन्होंने ना तो बारात और बारातियों का खयाल रखने जैसी कोई बात की, ना ही पिछले दरवाजे से लेन-देन किया ...|
बारात आयी, लड़की वालो की आपत्ति थी, बिना आतिशबाजी के कही बारात होती है ?
ऐसा लग रहा है, किसी छोटे-मोटे आदमी की बेटी की शादी है ...!!!
भसुर "ताग-पात डालने के लिए आये, गहना हल्का है, असली नहीं लग रहा (तनिष्क का ब्रांडेड गहना था), ऐसी साड़ी ताग-पात डालने में ? इससे अच्छी तो हम नाउन को सेनुर बहोरायी देते है !!!
शादी चल रही थी, वर पक्ष शालीनता से बैठा था, और वधु पक्ष के उलाहने चल रहे थे ;- ये सब शादी करने आये है, या मातम मनाने ? इससे जादा लोग और हो हल्ला तो हमारे यहाँ सत्य नारायण की पूजा में हो जाता है !
डाल चढ़ा ! वधु पक्ष में जैसे भूकंप आ गया !!! बस इतने ही गहने ? ये तो नकली लग रहे है ? और कितनी सटरहिया साड़ीया है, सब फटीचर है, अपनी तो कोई इज्जत ही नहीं, हमारी इज्जत भी नीलाम कर दिए, लड़की की बुआ और मौसी चिल्लाये जा रही थी, माँ और चाची भी उनके साथ-साथ भुनभुनाती दिखी ||
शादी संपन्न हुई !!! लड़का कुर्सी ले कर किनारे बैठा | ससुर मथ-ढकाई के लिए आये, मांग-टीका और साड़ी के साथ, मथ ढकाई चल ही रही थी, कि वधू पक्ष की औरतों का विलाप शुरू "कैसे फटीचर है सब, कैसे गुजारेगी हमारी मन्नू ! वहा "
ससुर ने प्रतिवाद किया, और जिसके नतीजे सारी औरतो का आक्रोश फूट पड़ा ...
ससुर ने नाराजगी दिखाई, "ये भी कोई तरीका है, शुरू से ही आप लोग अपमानित कर रहे है, हम शादी के लिए आपके दरवाजे पर नहीं गए थे, आप ने सारा -देखभाल के शादी की और इस तरह की बदतमीजी और अपमान के लिए हम नहीं आये |
...लड़की के भीतर की लक्ष्मी-बाई जाग गयी, उसने अपने ससुर को "ख़बरदार अंकल, मेरी बुआ से तमीज से बात करिए" कहते हुए डपट दिया !!!
हुआ हौ-हौ , कच कच सलीके से , लड़की वाले हर तरीके से भारी थे, लड़के वाले तीन का तेईस सुने और अपना स मुह लेकर रह गए !
... ... ... पर शुरू से चुप लड़का एकाएक बोल पड़ा "मै ये शादी नहीं करूँगा !!!"
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ये घटना किन्ही दो शादियों का कोलाज है, जहा प्रत्यक्ष तौर पर मै मौजूद था, लड़के वाले बिना विदाई के गए, ख़ूब पंचायत चली...अंत क्या रहा यह नहीं बताउगा पर आगे पढ़े ...
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... लड़का अड़ गया, नहीं तो नहीं ! पंचायत हुई, पुलिस आयी , सबने लड़के पर दबाव बनाया, नहीं तुम्हारे कहने से कैसे हो जायेगा कि "मै ये शादी नहीं करूँगा" अब कोई भी लड़के को सही नहीं कह रहा था, सबकी कोशिश लीपापोती की थी, कोई लड़की आगे नहीं आयी "तुमने एक दम ठीक किया, मै शादी करुँगी तुमसे", वो लडकियों के नजर में खलनायक है, और दहेज़ से जुड़ी धाराओ का अभियुक्त भी, उसके समर्थन में कोई नहीं है, न कोई नातेदार, न रिश्तेदार | सबका कहना है, वो कुल कलंक है , एक लड़की का जीवन उसने बर्बाद कर दिया ...!!!
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ठीक यही काम टीवी पर देश भर की लाडली बनी एक बिटिया ने भी किया था ...???
(अनजानी राहों का अकेला मुसाफ़िर )
—                             कश्यपकिशोरमिश्रा
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