Thursday, May 30, 2013

नक्सल हमले का एक स्याह पहलू, यह भी...

ये आदिवासियों का सरकार के विरुद्ध दिखया गया आक्रोश नहीं है, ये देश की जनता को भरमाने के लिए पहनाये परांदे है| देश की जनता के आक्रोश को रंग भरने को चीनी हथियारो की खेप पे खेप नजर नहीं आ रही, आपको ? ये एक कुटिल और कमीने फ्यूडल स्टेट चायना, जो तिब्बत और सिक्यांग के नागरिको के अमानवीय दमन और अपने देश के नागरिको पर टैंक चलवाने जैसी अमानवीय हरकत करने में परहेज नहीं करता , का परोक्ष युद्ध है, और माओवादी बने हिन्दुस्तानी उसके आसान मोहरे ...

सेनाओ को कही न कही एक दायरे में रहना होता है , पर नक्सलियों के लिए ऐसा कोई दायरा नहीं | सरकार की तरफ से की गयी हत्या निंदनीय है, तो नक्सलवादियो की तरफ से की गयी हत्या भी निंदनीय है, पर सबसे अजीब मानसिकता तो उनलोगों की है, जो चीन के इस हाथ को देख कर भी अनदेखा कर रहे है, ये ही वो लोग है, जो मासूम आदिवासियों के असली हत्यारे है और उनका चरित्र समझना सबसे जादा जरुरी है|

...चीन अपनी सार्वभौमिकता पर (जो वास्तव में उसकी वास्तविक परिधि से दुगुनी से भी जादा जबरजस्ती उसने बना रखी है ) उठी अंगुली के आदमी का सर ही काट देता है, जो उसके कब्जाए प्रान्तों और उसके अपने प्रान्तों के नागरिक भी है, तो राष्ट्र की अवधारणा को मूर्खतापूर्ण मानने वाले हमारे देश के विश्व-नागरिको की मदद कर वो सिर्फ अपने चारे का इंतजाम कर रहा है, चीन को भी पता है, जो अपने देश का नहीं हुआ, वो एक दुसरे देश चीन का क्या होगा, और लोगों से निपटने के तरीके भारत सरकार से जादा "चीनी जनवादी गणतंत्र" को पता है !

आदिवासियों के साथ, सिर्फ माओवादी खड़े है, का तर्क खोखला है, क्योकि माओवादी आदिवासियों के साथ खड़े हो न हो, भारत के विरुद्ध और चीन के साथ जरुर खड़े है |

अगर यह निरपराध आदिवासियों पे बर्बर अत्याचार का बदला है, तो इस तर्क पर भी सिर्फ हँसी आती है, एक निरपराध का बदला दुसरे निरपराध से, बाबर का बदला जुम्मन से, ये तो कोई तर्क नहीं है, भाई !

आज का चीन एक फ्यूडल स्टेट है, और उसे विचार के नाम पर लोगो को मुर्ख बनाना, ख़ूब आता है !!!

===============================================================
फेसबुक लिंक

No comments:

Post a Comment