Saturday, August 24, 2013

क्या वाकई इकबाल पाकिस्तान के सह संस्थापक थे ?

हमारे खूब सारे पाकिस्तानी और हिन्दुस्तानी भाई , अक्सर अल्लामा इकबाल को पाकिस्तान की मजहबी सोच की बुनियाद की एक मजबूत ईट मानते है, पर अक्सर इकबाल का एक अलहदा चेहरा भी नुमाया होता रहता है, एक ऐसा इकबाल जो, हरियाला बन्ना, मजहबी हरियाली से रंगा होने से नहीं बल्कि अपनी माटी की समरस खाद पानी की वजह से हरियाला दिखता है, भला एक कट्टरपंथी मजहबी नमाज अदा करने का जिक्र चलने पर बेसाख्ता ही कैसे बोल उठता है:-
"जो मैं सर-ब-सजदा हुआ कभी, तो ज़मीं से आने लगी सदा
तेरा दिल तो है सनम आश्ना, तुझे क्या मिलेगा नमाज़ में|

बात यही नहीं रूकती, वह अपने तरन्नुम में काफ़िरो के शिवाले की तामीर की बात करने लगता है और आप मानते रहें शिर्क, पर यह अपनी बात कहते बाज नहीं आता कि;-
"सूनी पड़ी हुई है मुद्दत से दिल की बस्‍ती
आ इक नया शिवाला इस देस में बना दें

दुनिया के तीरथों से ऊंचा हो अपना तीरथ
दामान-ए-आस्‍मां से इसका कलस मिला दे"

मै अचरज में हूँ, वाकई गोकि इकबाल जिन्ना नहीं थे, लिहाजा लकीरों के मानी उन्हें जिन्ना के मुकाबिल खूब खूब और खूब पता थे, बेशक जिन्ना के साथ इकबाल को पाकिस्तान का सह संस्थापक माना जाता रहा है, लेकिन मशहूर पाकिस्तानी अखबारनवीस इरशाद हक्कानी के अनुसार इकबाल ने भारत से बाहर मुस्लिम मुल्क की बात कभी नहीं की, बल्कि भारत के भीतर ही एक मुस्लिम राज्य का प्रस्ताव रखा था।

हक्कानी के दावे पर हालांकि पाकिस्तान के दो मुख्य इतिहासकारों फतेह मोहम्मद मलिक और डॉ. सफदर महमूद ने सवालिया निशान लगाते हुए कहा कहा कि इकबाल ने ब्रिटिश हुकूमत से बाहिर एक अलग मुल्क की बात की थी, जो जाहिर तौर पर भारत के बाहर ही होता। मलिक ने उनके दावे को खारिज करने वाले दो और इतिहासकारों के. अजीज और डॉ. मुबारक अली को आलोचना करते हुए कहा कि 1930 में अपने संबोधन में इकबाल ने दक्षिण एशिया में मुसलमानों के लिए अलग देश की परिकल्पना की थी।

मगर दिलचस्प है, कि सुहैल जहीर लारी की ' ए इलस्ट्रेटेड हिस्ट्री ऑफ सिंध ' के नए संस्करण में ई. जे. थॉमस लिखे इकबाल के एक ख़त को शाया किया गया है। इसमें इकबाल लिखते हैं , ' मैंने एक गलती की है जिसे मैं तुरंत बता दूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह काफी गंभीर है। मुझे पाकिस्तान नाम की एक योजना का कर्णधार बताया जा रहा है। पाकिस्तान मेरी योजना नहीं है। मैंने अपने संबोधन में ये सुझाव रखा था वह एक मुस्लिम प्रांत यानी प्रस्तावित भारतीय संघ के पश्चिमोत्तर हिस्से में जहां मुस्लिमों की ज्यादा आबादी है को देश का एक प्रांत बनाने संबंधी था। ' लिहाजा इसमें कोई शुबहा नहीं कि इकबाल ने अपने मित्र थॉमस को पत्र लिखकर अपनी बात साफ़ कर दी थी की वह पाकिस्तान की कल्पना के हिस्सेदार नहीं है |

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