Saturday, August 24, 2013

आप गाय काटो, आपका पड़ोसी सूअर काटे ...!

अल्लाह ने कुरआन में कहाँ "गाय " का मांस खाने की इजाजत दी है ? अल्लाह कहता है, "वो हर चीज खाओ जो मैंने तुम्हारे खाने के लिए पैदा की है" अल्लाह यह भी कहता है "अमन का काम करो" आप गाय खाइए, शौक से मगर कुरान इस मुल्क से और इसके अवाम से बड़ी नहीं है, और न ही समाज के अमन चैन को "कुरआन" की आयतों की बिना पर भंग करने की इजाजत दी जा सकती है, कोई भी मजहबी किताब, कोई भी, फ़कत कुछ लोगों की बाकी सारे लोगों को उल्लू बनाने की साजिश है, अगर वह आदमी की जाती सोच को कट्टरवाद की जानिब ले जाती है और अपने समय, समाज और क़ायदे के लिहाज से आपको बोदा बनाती है|
बहुतों के लिए, जिसमे बहुत सारे मुसलमान भी है, कुरआन के मानी "शैतानी आयतें" भी है, इस तरह, आप बेशक अपने आप को अपने दिए कुरआन के मानी से आलिम समझते रहें पर नफ़रत को शह देने वाले एक छोटे से अमले के अलावे बाकी के लिए आप जाहिल इंसान है | किसी को भी, कतई यह हक़ नहीं की वह तय करे की चाहे अकबर हों या ग़ालिब, वो मुसलमान है, या नहीं ? इस तरह की बात करने और नारे उछालने वालों ने ही, मजहब को "गटर" में तब्दील कर दिया है |
आप बेशक गाय काटिए पर तब अपने दरवाजे पर सूअर काटे जाने पर हुआ -हुआ मत करिए | आप बनिए "मौदूदी" वाले मुसलमान मगर याद रखिये जब आपके ही चेले फ़ीता लेकर आपकी दाढ़ी नापने चलेगे तो बचाने न तो कुरान कभी आयेगी न कभी आयी है |
अमन की बात करने वाले डरपोक नहीं होते, क्योकि सबसे पहली लड़ाई उन्हें उन अपनों से ही लड़नी पड़ती है, जो तलवार लेकर "क़त्ल -क़त्ल " के नारे लगा रहे होते है और तलवारे सिरफ गर्दन पहचानती है और तलवार की बात करने वालों की नफरत सिरफ कत्ल की जुबान समझती है, तो अमन की बात करने वाले, सबसे बहादुर लोग होते है और ख़ुदा भी उनकी बंदगी करता है, क्योकि अगर ख़ुदा ने ये दुनिया बनायीं है, तो उसकी हिफ़ाजत अमन पसंद लोगों की वजह से ही है |
चरमपंथी होने का घटियापन हर मजहब में है, कही वह जालीदार टोपी के नीचे के आदमी में है, तो कही वह टीका लगाये आदमी में है |
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यह आलेख 
भाई Sharif Khan की एक टिप्पड़ी, जो मेरे मित्र Azhar Khan की वाल पर थी, उसके जबाब में था...! 
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"अल्लाह ने चूँकि गाय का मांस खाने की इजाज़त दी है इसलिए किसी भी इन्सान को इस पर पाबन्दी लगाने का हक नहीं है। जहाँ तक अकबर बादशाह की बात है तो वह तो मुसलमान ही नहीं था। मथुरा के मुसलमान हों या किसी दूसरी जगह के हों, वह हिन्दू चरम पंथियों के डर से गाय पर पाबन्दी की बात करते हैं।"

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