हममे से कितनो को पता है, कि इराक और अफगानिस्तान में अमरीकी फौजो ने डीप्लेटेड युरेनियम का इस्तेमाल बमों में किया था ? आतंक के विरुद्ध युद्ध के समर्थन के नाम पर मचाये अमरीकी आतंक हमारी सवेदना से परे रहते है | दुनीया भर से अमरीका घुमने गए लोग औए साथ -साथ अमरीकी लोगों के लिए "ग्राउंड जीरो" आतंकवाद के क्रूर चेहरे की एक विलासितापूर्ण नुमाइश है, क्या जापान की हिरोशिमा -नागासाकी भी आतंकवाद की ही और उससे कई गुना ज्यादा क्रूर नुमाइश नहीं है ? क्या समूचा का समूचा अफगानिस्तान और इराक बेशर्म और बर्बर अमरीकी आतंकवादी गतिविधियों का बनाया ग्राउंड जीरो नहीं है ?
अमरीका महत्वपूर्ण है, स्नोडेन नहीं ! ब्लादिमीर पुतिन जो रूस के सोवियत युग की बची-खुची अकांछा के अकेले बचे प्रतिनिधि नजर आते है, इस बयान के साथ अमरीका के साथ साथ रूसी जनता को भी आश्वस्त करते है, नहीं घबराओ नहीं, हम अमरीका के ही साथ है, अमरीका, जो आज की दुनियाभर की मरीचिकाओ का प्रोजेक्टर है, उसका खुश रहना जरुरी है |
...और यहाँ अमरीका के मानी, वहाँ के असली निवासी रेड-इन्डियन वाला या उनको भी साथ लेकर चलने वाला अमरीका नहीं, वह अमरीका है, जो आक्रान्ता अप्रवासियो;- जिन्होंने मूल-निवासी रेड इन्डियन की हत्या की, उन्हें गुलाम बनाया और अमरीकी भूभाग पर जबरी कब्ज़ा किया;- का प्रतिनिधित्व करता है और यहाँ आप बराक ओबामा के चेहरे के धोखे में न पड़े, उनका चेहरा बस एक लिफ़ाफ़ा है, जिसका असल सामान से कोई सम्बन्ध नहीं |
अमरीका और ब्रिटेन ने मलाला युसुफजई को हाथो हाथ लिया, बीबीसी ने उसकी डायरी प्रकाशित कर कर के उसे एनी फ्रेक बना देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, पर मलाला की तरह ही न जाने उसकी कितनी बहने, अमरीकी बमबारी में मारी गई, दुनिया भर में, और अफ़गानिस्तान तथा इराक में आज भी यह बदस्तूर जारी है...!
मलाला, ने बेशक, तालिबान के नक़ाब नोच फ़ेंके, बहुत खूब, पर जो मुह उसकी वाह-वाही में लगे है, नकाबपोश वो भी है, उनके चेहरों पे भी, मलाला युसुफजई की बहनों के खून के धब्बे है !
अमरीका महत्वपूर्ण है, स्नोडेन नहीं ! ब्लादिमीर पुतिन जो रूस के सोवियत युग की बची-खुची अकांछा के अकेले बचे प्रतिनिधि नजर आते है, इस बयान के साथ अमरीका के साथ साथ रूसी जनता को भी आश्वस्त करते है, नहीं घबराओ नहीं, हम अमरीका के ही साथ है, अमरीका, जो आज की दुनियाभर की मरीचिकाओ का प्रोजेक्टर है, उसका खुश रहना जरुरी है |
...और यहाँ अमरीका के मानी, वहाँ के असली निवासी रेड-इन्डियन वाला या उनको भी साथ लेकर चलने वाला अमरीका नहीं, वह अमरीका है, जो आक्रान्ता अप्रवासियो;- जिन्होंने मूल-निवासी रेड इन्डियन की हत्या की, उन्हें गुलाम बनाया और अमरीकी भूभाग पर जबरी कब्ज़ा किया;- का प्रतिनिधित्व करता है और यहाँ आप बराक ओबामा के चेहरे के धोखे में न पड़े, उनका चेहरा बस एक लिफ़ाफ़ा है, जिसका असल सामान से कोई सम्बन्ध नहीं |
अमरीका और ब्रिटेन ने मलाला युसुफजई को हाथो हाथ लिया, बीबीसी ने उसकी डायरी प्रकाशित कर कर के उसे एनी फ्रेक बना देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, पर मलाला की तरह ही न जाने उसकी कितनी बहने, अमरीकी बमबारी में मारी गई, दुनिया भर में, और अफ़गानिस्तान तथा इराक में आज भी यह बदस्तूर जारी है...!
मलाला, ने बेशक, तालिबान के नक़ाब नोच फ़ेंके, बहुत खूब, पर जो मुह उसकी वाह-वाही में लगे है, नकाबपोश वो भी है, उनके चेहरों पे भी, मलाला युसुफजई की बहनों के खून के धब्बे है !
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